भगवती गौरी का ध्यान करें : -
- नमो देव्यै महादेव्यै शिवायै सततं नम:
नम: प्रकृत्यै भद्रायै नियता: प्रणता: स्मताम्।।
श्री गणेशाम्बिकाभ्यां नम:, ध्यानं समर्पयामि।
इसके बाद दाहिने हाथ में अर्घ्य पात्र लेकर उसमें कुश, पुष्प, अक्षत, जल और द्रव्य रखकर संकल्प करें -
- ॐ विष्णुर्विष्णु: अध ब्रह्मणोऽह्नि द्वितीयपरार्धे
श्री श्वेतवाराहकल्पे वैवस्वतमन्वन्तरेऽष्टाविंशतितमे-
कलियुगे कलिप्रथम चरणे बौद्धावतारे भूर्लोके जम्बूद्वीपे भरतखण्डे भारतवर्षे... क्षेत्रे नगरे ग्रामे.... नाम संवत्सरे श्रावण मासे (शुक्ल/ कृष्ण) पक्षे- तिथौ... वासरे (अपना गौत्र) गौत्र: नाम अपना (शर्मा/ वर्मा गुप्तो) हम मम सर्वारिष्ट निरसनपूर्वक सर्वपापक्षयार्थ-
दीर्घायुरारोग्य धनधान्यपुत्र-पौत्रदिसमस्तसम्पत्प्रवृद्धयर्थ श्रुतिस्मृति पुराणोक्तफलप्राप्तर्थ श्रीसाम्बसदाशिवप्रीत्यर्थ पार्थिव लिंगपूजनमहं करिष्ये।
इसके बाद भूमि की प्रार्थना करें -
ॐ ह्रीं पृथ्विये नम:।
- मिट्टी ग्रहण- उद्धल्तासि वराहेण कृष्णेन शतबाहुना।
मृत्तिके त्वां गृह्रामि प्रजया च धनेन च।।
या- ॐ हराय नम: बोलकर मिट्टी धारण करें।
इसके बाद
- ॐ महेश्वराय नम: बोलकर लिंग का गठन करें। यह अंगूठे से छोटा न हो और न ही बित्ते से बड़ा हो।
विशेष- जो लोग संक्षिप्त में करना चाहें वो यहां से पूजन शुरू करें।
मिट्टी के लिंग बनाकर या शिवलिंग को घर में रखकर पूजन करें।
* ॐ शूलपाणये नम:, हे शिव इह प्रतिष्ठितो भव:, यह कहकर लिंग की प्रतिष्ठा करें।
प्रतिष्ठा के बाद शिवजी का ध्यान करें।
ध्यान- ध्यायेन्नित्यं महेशं रजतगिरिनिभं चारुचन्द्रावतंसं
रत्नाकल्पोज्ज्वलांग परशुभृगबराभीतिहस्तं प्रसन्नम्।
पधासीनं समन्तात स्तुतममरगणैर्व्याध्रकृत्तिं वसानं
विश्वाधं विश्ववीजं निखिलभयहरं पववत्रंत्रिनेत्रम्
आवाहन- ॐ पिनाकघृषे नम: श्री साम्बसदाशिव पार्थिवेश्वर इहागच्छ, इह प्रतिष्ठ, भव।
श्री भगवते साम्बसदाशिव (पार्थिवेश्वराय) नम: आवाहनार्थे पुष्पं समर्पयामि। (बोलकर पुष्प चढ़ाएं)।
पाध- ॐ नम: शिवाय, श्री भगवते साम्बसदाशिवाय नम:, आसनार्थे अक्षतान समर्पयामि (चावल चढ़ाएं)
अर्घ्य- ॐ नम: शिवाय, श्री भगवते साम्बसदाशिवाय नम:, आचमनीय जलं समर्पयामि। (जल चढ़ाएं)
मधुपर्क- ॐ नम: शिवाय, श्री भगवते साम्बसदाशिवाय नम:, मधुपर्क समर्पयामि। (शहद चढ़ाएं)
शुद्धोदक स्नान- ॐ नम: शिवाय, श्री भगवते साम्बसदाशिवाय नम:, स्नानीयं जलं समर्पयामि।
पंचामृत स्नान- ॐ नम: शिवाय, श्री भगवते साम्बसदाशिवाय नम:, पंचामृत स्नान समर्पयामि।
(पंचामृत चढ़ाएं)
शुद्धोदक स्नान- ॐ नम: शिवाय, श्री भगवते साम्बसदाशिवाय नम:, शुद्धोदक स्नान समर्पयामि।
(शुद्ध जल चढ़ाएं)
आचमन- शुद्धोदक स्नानान्ते आचमनीयं जलं समर्पयामि (जल चढ़ाएं।
अभिषेक- पार्थिव लिंग पर महिम्न स्तोत्र या वैदिक रुद्र सूक्त से या घर पर कर रहे हों तो नम: शिवाय की माला से अभिषेक करें। फिर गन्धोदक स्नान- ॐ नम: शिवाय, श्री भगवते साम्बसदाशिवाय नम:, गन्धोदक स्नान समर्पयामि।
(गन्धोदक से स्नान कराएं)
शुद्ध स्नान- गन्धोदकस्नानान्ते शुद्धस्नानं समर्पयामि।
शुद्धोदक स्नानान्ते आचमनीयं जलं समर्पयामि।
(शुद्ध जल से स्नान एवं आचमन कराएं)।
वस्त्र- ॐ नम: शिवाय, श्री भगवते साम्बसदाशिवाय नम:, वस्त्रं समर्पयामि। (वस्त्र चढ़ाएं)
आचमन- वस्त्रांन्ते आचमनीयं जलं समर्पयामि। (जल चढ़ाएं)
यज्ञोपवीत- ॐ नम: शिवाय, श्री भगवते साम्बसदाशिवाय नम:, यज्ञोपवीत समर्पयामि। (जनेऊ चढ़ाएं)
फिर एक अंचूनी (आचमनी) जल चढ़ाएं।
चन्दन- ॐ नम: शिवाय, श्री भगवते साम्बसदाशिवाय नम:, चन्दन समर्पयामि। (चन्दन चढ़ाएं)
भस्म- ॐ नम: शिवाय, श्री भगवते साम्बसदाशिवाय नम:, भस्म समर्पयामि। (भस्म चढ़ाएं)
अक्षत- ॐ नम: शिवाय, श्री भगवते साम्बसदाशिवाय नम:, अक्षतान समर्पयामि। (अक्षत चढ़ाएं)
पुष्पमाला- ॐ नम: शिवाय, श्री भगवते साम्बसदाशिवाय नम:, पुष्पमालां समर्पयामि। (पुष्प, पुष्पमाला चढ़ाएं)
बिल्वपत्र- ॐ नम: शिवाय, श्री भगवते साम्बसदाशिवाय नम:, बिल्वपत्राणि समर्पयामि। (बिल्वपत्र चढ़ाएं)
फिर दूर्वा एवं धतूरे का फूल चढ़ाएं।
फिर धूप, धूप के बाद दीपक भगवान को बताएं, यह कहकर -
ॐ नम: शिवाय, श्री भगवते साम्बसदाशिवाय नम:, धूप-माघ्रापयामि, दीपं दर्शयामि।
उसके बाद नैवेद्य लगाएं
ॐ नम: शिवाय, श्री भगवते साम्बसदाशिवाय नम:, नैवेद्यं समर्पयामि (निवेदयामि)। आचमनीयं जलं समर्पयामि। ऋतुफलं समर्पयामि।
पुन: ऋतुफलं समर्पयामि।
फिर- ताम्बुल फलं हिरण्यगर्भ दक्षिणां समर्पयामि। इसके बाद प्रभु शिवजी की आरती करें।
आरती- ॐ नम: शिवाय, श्री भगवते साम्बसदाशिवाय नम:, आरर्तिक्यं समर्पयामि। (आरती करके जल गिराएं)
फिर मंत्र पुष्पांजलि
ॐ नम: शिवाय, श्री भगवते साम्बसदाशिवाय नम:, मंत्र पुष्पांजलि समर्पयामि। (फूल चढ़ा दें)
इसके बाद प्रदक्षिणा करें, प्रदक्षिणा के बाद क्षमा-प्रार्थना करें।
आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्।
पूजां नैव हि जानामि क्षमस्त परमेश्वर।।
फिर विसर्जन, विसर्जन के बाद समर्पण जल छोड़ें।
अनेन शिवपूजकर्मणा श्री यज्ञस्वरूप: शिव: प्रीयताम् न मम। पूजन कर्म समाप्त करें।
विशेष- उपरोक्त पूजन संक्षिप्त में घर पर ही प्रतिदिन कर सकते हैं। पूजन करने से पहले समस्त सामग्री अपने पास रख लें, जैसे- आरती की थाली, दीपक, अगरबत्ती, फूल, फूलमाला, पंचामृत, शुद्ध जल, घी, शहद, धतूरा, दूर्वा, कुशा आदि। पूजन करते समय पूर्ण ध्यान दें। शिवजी अवश्य आपकी मनोकामना पूर्ण करेंगे।